Zindgi ek kavita: life
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manjil

10/18/2022
जिंदगी एक कविता मुश्किल है मंजिल ये रास्ते है मुख्तलिफ,  और बिना सोचे समझे,हम किधर जा रहे है। ये कौनसा शहर है जाने,कौनसी गली है, जो इतनी बेफ...Read More

अन्न दाता

6/16/2022
जिंदगी एक कविता पतली पगडंडियों पे पैरो को जमाए चला है। मोटी डोरी से बैलों को पिराए चला है। सर पे सूती का गमछा बांधे हुए किसान, अपने बक्खर को...Read More

राशन,rashan

6/11/2022
जिंदगी एक कविता कितने गरीब से लोग यहां पर,चार पहिए में सवार है। सरकारी राशन लेने को लाइन,लगने भी तैयार है। बड़ी बड़ी सी बोरिया भर,राशन मुफ्त...Read More

तनहाई, alone

6/03/2022
जिंदगी एक कविता मौन पड़ी है मेज पर इन किताबों के जैसे,      मुरझा सी गई है जिंदगी,सुर्ख गुलाबो के जैसे। मनहुसियत का मुसलसल ये कैसा दौर है   ...Read More