Zindgi ek kavita: samaj
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संवेदना

6/12/2022
जिंदगी एक कविता रहम तेरा है मालिक सभी पे, तू फिर मुझसे गुस्सा कहां है जो बख्शा है तूने जहां को, उसमे मेरा ही हिस्सा कहां है।          जुबां ...Read More

साहब,sahab

5/31/2022
जिंदगी एक कविता  बड़े अजीब हो साहिब तुम,किस प्रकार की बात करते हो। इनको जो कभी मिला न हो,उस अधिकार की बात करते हो।। यहां दबे,कुचले,दलित-निर्...Read More