Yog kare kavita, योग करें कविता - Zindgi ek kavita

Yog kare kavita, योग करें कविता

Yog kare kavita



जिंदगी एक कविता

सुबह सवेरे जाग कर,एक नया प्रयोग करे।
रोगी अपने जीवन को,पूर्णत: आरोग्य करे।
सुंदर तन और स्वच्छ से मन इन दोनों का संजोग करे।
विश्व योग दिवस पर आओ,हम सब मिलकर योग करे।

अंतर्मन से हो आनंदित श्वास का उपयोग करें।
नित्य ये प्रवत्ति अपनाकर दूर पुराने रोग करें।
कर प्रणाम उगते सूरज को संकल्प ये सारे लोग करें।
विश्व योग दिवस पर आओ,हम सब मिलकर योग करे।
@साहित्य गौरव

जिंदगी एक कविता

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