फिर मिलेंगे शायरी, fir milenge - Zindgi ek kavita

फिर मिलेंगे शायरी, fir milenge

Fir milenge/फिर मिलेंगे
जिंदगी एक कविता
जिंदगी एक कविता

इतमीनान तो रखिए,
बड़ी उलफत से मिलेंगे।
तुम्हारी महफिल में बेशक
हम इज्जत से मिलेंगे।
बेसब्र न हो तुम इतना
मुझसे मिलने की खातिर,
साथी हूं बुरे वक्त का फिर,
कभी फुरसत से मिलेंगे।@साहित्य गौरव

जिंदगी एक कविता 

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