राशन,rashan - Zindgi ek kavita

राशन,rashan

जिंदगी एक कविता

जिंदगी एक कविता


कितने गरीब से लोग यहां पर,चार पहिए में सवार है।
सरकारी राशन लेने को लाइन,लगने भी तैयार है।
बड़ी बड़ी सी बोरिया भर,राशन मुफ्त का लाते है,
अति गरीबी रेखा के नीचे अब कार वाले आते है।
गांव गांव और शहर शहर में हर कही कोई रंग दार है।
कोई बात नही सब खुल के लूटो अपनी ही सरकार है।
@गौरव

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