नजरिया , nazariya - Zindgi ek kavita

नजरिया , nazariya


लाख गुरूर रख ले तू ए हुस्न वाले,
नजर अन्दाज़ करने का हुनर हम भी रखते है !
भले तुम रख लो अपना घमंड अपने भीतर
हम देखने का नजरिया सबसे अलग रखते है! 
@साहित्य गौरव

कोई टिप्पणी नहीं