अकेलापन
वो आए इस तरह ,और यूंही चल दिए,
दिल के अरमान सारे एक,पल में ही कुचल दिए
कबसे ये उम्मीद लगाए थे
राहों में पलके बिछाए थे।
वर्षो से इंतजार था जिनका
जो दिल बेकरार कर बैठे थे,
ख्वाबों में ही सही सनम,
उनसे हम प्यार कर बैठे थे,
मंसूबे थे जो मोहब्बत के वो अब हमने ही बदल लिए
तुम आए इस तरह ,और यूंही चल दिए,
मिलने की वो उनसे मेरी
अबतलक जो आस बांकि थी
जा रही हो जाते जाते
जबतलक ये सास बांकी थी
इसके के बाद मोहब्बत सुन,
रहेगा न कोई वास्ता,
भटकना न कभी फिर से
जो बंद हो गया रास्ता,
कही किसी और रास्ते में दूर,अकेले हम निकल लिए
जो न आए कभी लौट के और यूंही चल दिए।

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