मदहोश ,madhosh - Zindgi ek kavita

मदहोश ,madhosh


जिंदगी एक कविता 

जिंदगी एक कविता

हासिल क्या हुआ ए जिंदगी तुझे पाकर ही,
मदहोशी में थे तो बेहतर ही थे I
ना थी ख्वाहिशें ना शिकायत थी किसी से,
हम बेबसी में थे तो बेहतर ही थे I
अब कहना है क्या और सुनना है क्या जब खुद से ही खफां हो तो ,
और कैसे अब करोगे बयां अपने हालातों को ,
अरे जब खामोशी में थे तो बेहतर ही थे। @ साहित्य गौरव 

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