फरमाहिश पर कविता, farmahish par kavita - Zindgi ek kavita

फरमाहिश पर कविता, farmahish par kavita

जिंदगी एक कविता

zindgi ek kavita

कि काश कोई मेरा भी होता,
नाकाम,अधूरी ख्वाहिशों के जैसे,
कहने को ही सही पर अपना तो होता,
बेसब्र,बेहिसाब गुंजाइशों के जैसे।
ये रिश्ते ये नाते सब बेमानी से लगते है,
हासिल इस दुनिया में कुछ भी नही होता,
सिवाय अधूरी फरमाइशों के जैसे।@गौरव

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