खुश हूं,happy poem in hindi - Zindgi ek kavita

खुश हूं,happy poem in hindi

जिंदगी एक कविता


कुछ पाने की जब खुशी न हो तो, 
तेरे खोने का गम क्यूं करूं।
तू खुद अपनी मर्जी से बिछड़ा है
अपनी आंखे नम मैं क्यूं करूं।
मुश्किल राह यहां मोहब्बत की,
बाजार रोज सजाया जाता है।
इस दुनिया में सच्चे आशिक को
कदम कदम पे रूलाया जाता है।
तू खुद जो इतना संगदिल है तो
तुझ पे ही रहम मैं क्यों करूं।
...कुछ पाने का...@गौरव
मोहब्बत नहीं थी मतलब था,
तु रोज निभाया करती थी।
चंद रोज की बस ये उल्फत थी,
जबरन दिखाया करती थी।
खेर भला हो तेरा तूने,
सही वक्त पे मुझे जगा दिया।
आंखों में जो धूल थी मेरी 
अच्छा ही किया जो हटा दिया।
अब अपनी मर्जी का मालिक हूं,
तेरा कहा करम मैं क्यों करूं।
....कुछ पाने का.....@गौरव

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