देहाती चुनाव Rural election
जिंदगी एक कविता
काए मोरे दद्दा का हो गओ हीना जो,
देहात को माहौल इतनौ काए गरमा रओ है।
घूमन लगे है का अब्बई से चोंगे,
बेजई हो हल्ला जो मचा रहो है।
बाप,महतारी,लुगाई,टूटा टूरी,
सबई को काए ये चिल्ला रओ है।
काए ओ बड्डो काए सबके मिले का,
आज मेरो भी जी बेजइ मचला रओ है।
बटन लगे है का पउआ अबसे हीना भी
जो चुनाओ का का दोबारा फिरे आरव है।
@साहित्य गौरव


कोई टिप्पणी नहीं