साथ sath - Zindgi ek kavita

साथ sath

जिंदगी एक कविता

जिंदगी एक कविता

जो न निभा पाओ तो जिम्मेदारी छोड़ दो,
तुम आज से अभी से मुझसे रिश्तेदारी छोड़ दो।
अब तेरे बस की बात नही रिश्तों को संभाल पाना,
चार लोगो को दिखाओ ये समझदारी छोड़ दो।
कल मुझे ही न छोड़ दो तुम बीच राह में कही,
इसीलिए आज ही तोड़ दो ये साझेदारी छोड़ दो।
जो साथ न चल पाए ताउम्र अपने साथी के,
मतलब के लिए निभाओ वो होशियारी छोड़ दो।
@साहित्य गौरव

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