स्त्री , women par kavita
लज्जा है जिसकी प्रकृति वो स्त्री है,
ढांक कर रखे अपनी देह वो स्त्री है।
मातृत्व का भाव हो जिस निर्मल हृदय में ,
अपनों से करे जो सच्चा स्नेह वो स्त्री है।
ऐसी स्त्रियां नही तो क्या ये समाज है,
मर्यादा के बिना जैसे कोई अभिशाप है।
पवित्र प्रेम का परिचय निसंदेह वो स्त्री है।
ऐसी स्त्रियों से ही अस्तित्व कलयुग में धर्म का,
सदा होता है शीश पर जिनके आंचल शर्म का।
परम त्याग की परिभाषा वैदेही वो स्त्री है।
@साहित्यगौरव


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